छत्तीसगढ़ राज्य एवं झारखंड, बिहार, बंगाल, मैमनसिंह (बांग्लादेश) के सुविख्यात प्रधान तीर्थ पुरोहित  •  सीधे संपर्क करें: +91 9431289882 , +91 9934813088  •  गया जी में पिंडदान, श्राद्ध एवं समस्त वैदिक अनुष्ठान हेतु संपर्क करें  •   Well-known head pilgrimage priest of Chhattisgarh state, Jharkhand, Bihar, Bengal, Mymensingh (Bangladesh)  •  Contact us directly: +91 9431289882 , +91 9934813088  •  For Pind Daan, Shradh and all Vedic rituals in Gaya Ji, get in touch  •  
कॉल करें Call Now व्हाट्सएप पर लिखें WhatsApp Us
पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म  •  नारायण बलि श्राद्ध  •  त्रिपिंडी श्राद्ध  •  पितृ दोष निवारण पूजा  •  अक्षयवट श्राद्ध  •  फल्गु तीर्थ श्राद्ध  •  विष्णुपद पूजा  •  गया श्राद्ध  •   Pind Daan & Shradh Karma  •  Narayan Bali Shradh  •  Tripindi Shradh  •  Pitradosh Niwaran Puja  •  Akshayvat Shradh  •  Falgu Tirth Shradh  •  Vishnupad Puja  •  Gaya Shradh  •  

Gaya Shradh

गया श्राद्ध

गया श्राद्ध

video

गया में श्राद्ध (पिंडदान) का बहुत महत्व है। यह पितरों को मोक्ष प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। गया में श्राद्ध करने से 108 कुलों और 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है, ऐसा माना जाता है। गया में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। गया में श्राद्ध का महत्व:
मोक्ष प्राप्ति:
गया में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा माना जाता है।
पितृ ऋण से मुक्ति:
गया में श्राद्ध करने से व्यक्ति पितृ ऋण से मुक्त हो जाता है, ऐसा धार्मिक ग्रंथों में लिखा है।
108 कुलों का उद्धार:
गया में पिंडदान करने से 108 कुलों और 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है, ऐसी मान्यता है।
भगवान विष्णु का आशीर्वाद:
गया में भगवान विष्णु स्वयं पितृ देवता के रूप में विराजमान हैं, इसलिए इसे पितृ तीर्थ भी कहते हैं।
गया में श्राद्ध करने की विधि:
1. पिंडदान:
पिंडदान में, चावल, जौ, तिल और दूध मिलाकर पिंडदान बनाया जाता है और पितरों को अर्पित किया जाता है।
2. तर्पण:
तर्पण में, जल, दूध, तिल और जौ को मिलाकर पितरों को अर्पित किया जाता है।
3. ब्राह्मण भोजन:
पिंडदान और तर्पण के बाद, ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।
4. दान:
गरीबों और ब्राह्मणों को दान दिया जाता है।
गया में श्राद्ध का महत्व पौराणिक कथाओं में भी है।
भगवान राम और राजा दशरथ:
ऐसा माना जाता है कि भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने गया में ही राजा दशरथ का पिंडदान किया था, ऐसा माना जाता है।
गयासुर:
गयासुर नामक एक असुर ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि उसका शरीर पवित्र हो जाए और लोग उसके दर्शन मात्र से पाप मुक्त हो जाएं। इस वरदान के कारण, गयासुर का शरीर पत्थर बनकर फैल गया और उस स्थान का नाम गया पड़ा, धार्मिक कथाओं में ऐसा बताया गया है। गया में श्राद्ध करने से न केवल पितरों को मोक्ष मिलता है, बल्कि यह परिवार के लिए भी शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।